Hindi News safety:yoyo हिन्दी न्यूज़,Hindi Latest safety News in Hindi, Breaking movie review लेटेस्ट हिंदी न्यूज़, ब्रेकिंग न्यूज़ : SAFETYYOYO - विशाल उल्का पिंड तेजी से बढ़ रहा है नासा से पृथ्वी की ओर 2020 अमेरिकी अंतरिक्ष

विशाल उल्का पिंड तेजी से बढ़ रहा है नासा से पृथ्वी की ओर 2020

विशाल उल्का पिंड तेजी से बढ़ रहा है नासा से पृथ्वी की ओर 2020

विशाल उल्का पिंड तेजी से बढ़ रहा है

 

 

विशालउल्कापिंडतेजीसे बढ़ रहा है नासा से पृथ्वी की ओर 2020 अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने एक विशाल उल्का पिंड की खोज की है जो नासा से पृथ्वी की ओर तेजी से बढ़ रहा है। बताया जा रहा है कि यह उल्कापिंड शरीर माउंट एवरेस्ट से कई गुना बड़ा हो सकता है।

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी का कहना है कि उसे उल्कापिंड से डरने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि यह पृथ्वी से कई किलोमीटर दूर चला गया है, जबकि कुछ वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि इससे पृथ्वी से टकराने का संदेह है।

 

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा विशाल उल्का पिंड तेजी से बढ़ रहा है नासा से पृथ्वी की ओर

 

 

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा कि उल्का पिंड 31, 319 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आ रहा है
दिया गया नाम name 52768 -1998 या 2. यह उल्कापिंड निकाय पहली बार 1998 में नासा द्वारा देखा गया था।

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी का अनुमान है कि यह उल्कापिंड अगले महीने 29 अप्रैल को पृथ्वी के पास से गुजरेगा। स्टीवन फराडो ने एक बयान जारी कर कहा कि उल्का 52768 सूर्य का एक चक्कर लगाने में 1,340 दिन या 3.7 वर्ष लगते हैं और एक दिन की धुरी 4 दिनों में पूरी हो जाती है। उल्कापिंड in english

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने कहा, एस्ट्रिलॉड उल्कापिंड तेजी से पृथ्वी की ओर आ रहा है
55,000 किमी / घंटा की गति से पृथ्वी की ओर बढ़ रहा है
अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने बताया कि शनिवार शाम 5 बजे भारतीय समय पृथ्वी के मार्ग से गुजरेगा
एस्ट्रलॉड उल्कापिंड को दुबई में बुर्ज खलीफा इमारत से बड़ा माना जाता है, जो पृथ्वी से 57 मिलियन किमी की दूरी से गुजरता है।

खगोलविदों के अनुसार, पृथ्वी पर हर 100 साल में एस्ट्रिलॉड उल्कापिंड के 50,000 गिरने की संभावना है।

अमृत ​​के आंतरिक समूह के डॉ। ब्रूस बेट्स ने इस तरह के क्षुद्रग्रह उल्कापिंड के बारे में कहा, ‘छोटे उल्का पिंड कुछ मीटर के होते हैं और अक्सर वायुमंडल में टकराते हैं और जल जाते हैं, पृथ्वी को कोई बड़ा नुकसान नहीं होता है।

ज़ी न्यूज़ की खबर के मुताबिक, पूरा  khaba rवीडियो आपको समझ में आ जाएगा

 

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी के अनुसार, 2013 में, वायुमंडल में 20 मीटर लंबा एस्ट्रिलोड उल्कापिंड टकरा गया था। 1908 में साइबेरिया के वायुमंडल से 40 मीटर लंबा उल्कापिंड टकराया और जल गया, जिससे पृथ्वी को कोई नुकसान नहीं हुआ।

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी के अनुसार, यदि इस आकार का कोई उल्कापिंड अब वायुमंडल से टकराता है, तो यह एक पूरे शहर को बर्बाद कर सकता है या भूकंप-सुनामी की संभावना को बढ़ा सकता है।

विशाल उल्का पिंड की जानकारी

 

आकाश में कभी-कभी एक ओर से दूसरी ओर अत्यंत वेग से जाते हुए अथवा पृथ्वी पर गिरते हुए जो पिंड दिखाई देते हैं उन्हें उल्का meteor और साधारण बोलचाल में ‘टूटते हुए तारे’ अथवा ‘लूका’ कहते हैं उल्काओं का जो अंश वायुमंडल में जलने से बचकर पृथ्वी तक पहुँचत है

उसे उल्कापिंड meteorite कहते हैं प्राय प्रत्येक रात्रि को उल्काएँ अनगिनत संख्या में देखी जा सकती हैं, किंतु इनमें से पृथ्वी पर गिरनेवाले पिंडों की संख्या अत्यंत अल्प होती है वैज्ञानिक दृष्टि से इनका महत्व बहुत अधिक है क्योंकि एक तो ये अति दुर्लभ होते हैं, दूसरे आकाश में विचरते हुए विभिन्न ग्रहों इत्यादि के संगठन और संरचना स्ट्रक्चर के

ज्ञान के प्रत्यक्ष स्रोत केवल ये ही पिंड हैं। इनके अध्ययन से हमें यह भी बोध होता है कि भूमंडलीय वातावरण में आकाश से आए हुए पदार्थ पर क्या-क्या प्रतिक्रियाएँ होती हैं। इस प्रकार ये पिंड ब्रह्माण्डविद्या और भूविज्ञान के बीच संपर्क स्थापित करते हैं

उल्कापिंडों का मुख्य वर्गीकरण उनके संगठन के आधार पर किया जाता है। कुछ पिंड अधिकांशत: लोहे, निकल या मिश्रधातुओं से बने होते हैं और कुछ सिलिकेट खनिजों से बने पत्थर सदृश होते हैं। पहले वर्गवालों को धात्विक और दूसरे वर्गवालों को आश्मिक उल्कापिंड कहते हैं। इसके अतिरिक्त कुछ पिंडों में धात्विक और आश्मिक पदार्थ प्राय: समान मात्रा में पाए जाते हैं, उन्हें धात्वाश्मिक उल्कापिंड कहते हैं। वस्तुत: पूर्णतया धात्विक और पूर्णतया आश्मिक उल्कपिंडों के बीच सभी प्रकार की अंत:स्थ जातियों के उल्कापिंड पाए जाते हैं जिससे पिंडों के वर्ग का निर्णय करना बहुधा कठिन हो जाता है।

संरचना के आधार पर तीनों वर्गो में उपभेद किए जाते हैं। आश्मिक पिंडों में दो मुख्य उपभेद हैं जिनमें से एक को कौंड्राइट और दूसरे को अकौंड्राइट कहते हैं। पहले उपवर्ग के पिंड़ों का मुख्य लक्षण यह है कि उनमें कुछ विशिष्ट वृत्ताकार दाने, जिन्हें कौंड्रयूल कहते हैं, उपस्थित रहते हैं। जिन पिंड़ों में कौंड्रयूल उपस्थित नहीं रहते उन्हें अकौंड्राइट कहते हैं।

उल्का पिंड किस मंडल में जलते हैं

आकाश में कभी-कभी एक ओर से दूसरी ओर अत्यंत वेग से जाते हुए अथवा पृथ्वी पर गिरते हुए जो पिंड दिखाई देते हैं उन्हें उल्का और साधारण बोलचाल में ‘टूटते हुए तारे’ अथवा ‘लूका’ कहते हैं। उल्काओं का जो अंश वायुमंडल में जलने से बचकर पृथ्वी तक पहुँचता है उसे उल्कापिंड कहते हैं। विकिपीडिया

 

उल्का पिंड क्या है

आकाश में कभी-कभी एक ओर से दूसरी ओर अत्यंत वेग से जाते हुए अथवा पृथ्वी पर गिरते हुए जो पिंड दिखाई देते हैं उन्हें उल्का और साधारण बोलचाल में ‘टूटते हुए तारे’ अथवा ‘लूका’ कहते हैं। उल्काओं का जो अंश वायुमंडल में जलने से बचकर पृथ्वी तक पहुँचता है उसे उल्कापिंड कहते हैं

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