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common mistakes safety in hindi

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common mistakes safety in Hindi

 

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common mistakes safety in hindi आपक स्वागत है दोस्तों एक्सीडेंट क्यों होता रहता है क्या आपने कभी जानने का कोशिश किया एक छोटी सी भूल चुक  से दुर्घटना बहुत बड़ा हो सकता है दुर्घटना बड़ी बड़ी ही नहीं होती हैं दुर्घटना छोटी भी हो सकती है लेकी दुर्घटना बहुत प्रकार के होते हैं common mistakes safety in hindi

 

छोटे से छोटे बड़े से बड़े जो भी घटना घटता है वह सब  सभी दुर्घटना में ही आते हैं एक छोटा सा एग्जांपल है दुर्घटना के प्रति मान लीजिए आपके पैर  में एक कांटा चुभ जाए और आप चिल्लाने लगेंगे मेरे पैर  में कांटा चुभ गया दोस्तों यह  भी दुर्घटना में ही आता है कार और बाइक हादसा दुर्घटना आम बात सि होगई है  या फिर कोई गाडी होता ही जारहा है

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कोई भी कार बाइक हो दुर्घटना आम बात सि होगई है दोसतो क्या आप को पता है दुर्घटना और हादसा दिन परती दिन बढता जारहा है accident hota hai tu sirf laparwahi Se Hota Hai ya Toh Phir Gadi Ki kharabi se https://en.wikipedia.org/ दोस्तों हम सब जानते हैं की दुर्घटना से हमें हमारे परिवार हमारे दोस्त और हमारे फैमिली को बहुत तकलीफ और नुकसान  पहुंचता है चाहे दुनिया में किसी का भी दुर्घटना हो लेकीन तकलीफ हम सभी को होता है

 

[common mistakes in hindi safety] औऱ हमे सुरक्षा जागरूकता केलीये 10 या 15मिनट निकालना बहुत जरूरी है हम सभी  लोग जानते दुर्घटना से  तकलीफ हम सभी को होता है यहां तक कि सरकार भी दुख जताता है और उसका भर पाया भी देता है आप लोग तो देखते ही होंगे जब भी दुर्घटना होता है यह कोई भी दुर्घटना हो चाहे कहीं आग लग जाए जाए कहीं एक्सीडेंट हो जाए सरकार मदद करती है

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सर्वेक्षण रिपोर्ट में कहा गया है,  लगातार छुट्टियों का असर स्कूलों के पाठ्यक्रम और गतिविधियों पर पड़ सकता है, इस पर चिंता व्यक्त करते हुए, इन माता-पिता ने सुझाव दिया कि ‘स्मॉग ब्रेक’ की भरपायी अन्य वार्षिक अवकाश में कमी करके किया जाए.’

सर्वेक्षण रिपोर्ट में कहा गया है, ‘लगातार छुट्टियों का असर स्कूलों के पाठ्यक्रम और गतिविधियों पर पड़ सकता है, इस पर चिंता व्यक्त करते हुए, इन माता-पिता ने सुझाव दिया कि ‘स्मॉग ब्रेक’ की भरपायी अन्य वार्षिक अवकाश में कमी करके किया जाए.’

ईसी लिये सुरक्षा जागरूकता बहुत जरूरी है उल्लेखनीय है common mistakes safety in hindi

कि 1 नवंबर को वायु प्रदूषण के आपात स्तर के करीब पहुंचने पर उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित ‘पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण (ईपीसीए) ने सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया था और प्रशासन ने 5 नवंबर तक स्कूलों को बंद करने का आदेश दिया था.

पिछले महीने भी, वायु की गुणवत्ता ‘आपात’ स्तर के आसपास पहुंचने के बाद स्कूलों को चार दिनों के लिए बंद करना पड़ा था.

 

किसी घायल को  50000 का मदद मिलता है और मृत्यु को .1 लाख .या 2 लाख. या 5. लाख तक  का मदद मिलता है लेकिन क्या मदद मिल जाने से दुर्घटना खत्म हो जाती है नहीं दोस्तों  https://www.safeopedia.com/

हम सभी को जागरुक होना होगा और दुर्घटना एक्सीडेंट को जड़ से खत्म करना होगा तभी जाकर दुनिया में कहीं एक्सीडेंट नहीं होगा और कहीं कोई खतरा नहीं रहेगा

 

आपकी ईकछा है तो जरूर दिजये सुरक्षा जागरूकता  योगदान

दोसतो हम लोग अछी तर से जानतेेहैं दुर्घटना दीन पर दिन केनसर कि तरह फेयल राहा है

सुरक्षा जागरूकता बहुत जरूरी है क्योंकि कदम कदम पर खतरा है

हम लोग को सुरक्षा के लिए कुछ ना कुछ   तैयारी कर ते रहना चाहिए और सुरक्षा के लिये हमेसा तेयार रहना चाहिए

तभी जाकर दुर्घटना हादसा जड़ से खत्म होगा

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राजधानी क्षेत्र में 70 प्रतिशत से अधिक अभिभावकों का मानना है

कि स्कूलों में अब अन्य छुट्टियों की तरह प्रदूषण से बचने के लिए भी अवकाश दिया जाए, ताकि उनके बच्चे दिल्ली की प्रदूषित हवा से बच सकें. इन अभिभावकों का कहना है कि हर साल 1 से 20 नवंबर तक स्कूलों में ‘स्मॉग ब्रेक’ होना चाहिए.

दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र के लगभग 10,000 लोगों को इस सर्वेक्षण में शामिल किया गया. जिसके मुताबिक, माता-पिता यह भी चाहते हैं कि स्मॉग ब्रेक की भरपाई गर्मी, सर्दी और वसंत की मिलने वाली छुट्टियों में कमी कर की जाए, ताकि वार्षिक अध्ययन कैलेंडर प्रभावित न हो.

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ‘लोकल सर्कल्स’ द्वारा किए गए सर्वेक्षण के निष्कर्षों के अनुसार, दिल्ली, फरीदाबाद, गाजियाबाद, नोएडा और गुड़गांव के 74 प्रतिशत माता-पिता चाहते हैं कि हर साल 1-20 नवंबर तक स्कूलों में अवकाश मिले जब शहर की वायु गुणवत्ता बेहद खराब रहती है.

सर्वेक्षण रिपोर्ट में कहा गया है, ‘लगातार छुट्टियों का असर स्कूलों के पाठ्यक्रम और गतिविधियों पर पड़ सकता है, इस पर चिंता व्यक्त करते हुए, इन माता-पिता ने सुझाव दिया कि ‘स्मॉग ब्रेक’ की भरपायी अन्य वार्षिक अवकाश में कमी करके किया जाए.’

 वायु प्रदूषण  के आपात स्तर के करीब पहुंचने

पर उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित ‘पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण ईपीसीए) ने सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया था और प्रशासन ने 5 नवंबर तक स्कूलों को बंद करने का आदेश दिया था. पिछले महीने भी, वायु की गुणवत्ता ‘आपात’ स्तर के आसपास पहुंचने के बाद स्कूलों को चार दिनों के लिए बंद करना पड़ा था.

दोसतो मेरा मानना है आज  हमारे देस मे दुर्घटना केनसर से भि बहुत बड़ा बिमरी है और हमारे देश मे केनसर की तरह  हमारे देश में दुर्घटना हादसा फेयल राहा है हम लोग को दुर्घटना हादसा जड़ से खत्म करना होगा common mistakes safety in hindi

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